दीदी की चूत मे लंड डाला Pyari didi ko choda

हेल्लो दोस्तों कैसे है आप सब। अब अपनी कहानी सुनाता हूँ. आप लोगों को तो

पता नही है मैं कितना बड़ा चुदक्कड हूँ और अपनी मम्मी, बुआ और चाची किसी

को भी बख्सा नही है मेने और अब तो उन सबकी सहेलियाँ भी अक्सर जब भी किटी

पार्टी करती है तो मेरा डांस देखने के बाद

गेंग चुदाई भी कराती रहती है और अपनी शादीशुदा बहन को भी जो की मुझसे 3

साल बड़ी है उनको भी मैने पहली बार उनकी ससुराल मे ही जब वो पप्पू (मेरा

भांजा) को दूध पीला रही थी तब उनकी जानदार चूचियाँ देखने के बाद जम कर

चोदा था और उसके बाद तो अक्सर ही जब भी मैं उसके ससुराल जाता तो वो मुझसे

चुदवाती थी क्योंकि जीजा जी चुदाई के मामले मे बहुत ढीले थे और फिर कुछ

मेरे लंड का जादू भी था की जिसको भी 1 बार कायदे से चोद डाला तो वो फिर

किसी और का लंड अपनी चूत मे चाहे लेकर घुसवाए पर मज़ा मेरे ही लंड से

पाती है।





और उस दिन भी यही हुआ मैं दीदी के ससुराल गया हुआ था और मुझे 3 दिन हो

गये थे पर जीजा की वजह से जीजी को चोद नही पा रहा था और उस दिन जब जीजाजी

ऑफीस के काम से 2 दिन के लिए बाहर गये और दीदी की सासू माँ मंदिर गयी हुई

थी। सुबह का वक़्त था मैं आंटी के मंदिर जाने का इंतजार ही कर रहा था और

उनके जाते ही फ़ौरन बेड से उठ कर किचन मे गया जहाँ दीदी बर्तन धो रही थी

मैं पीछे से जाकर उनके बोब्स दबाने लगा।





दीदी== अरे राज छोड़ो भी काम करने दो तुम सुबह..सुबह ही शुरू हो गये काम

करने दो अभी पप्पू उठ जाएगा तो रोना शुरू कर देगा फिर काम करना मुश्किल

हो जाएगा..



राज== दीदी अभी चुदवा लो ना एक तो आज 3 दिन बाद तुम अकेली मिली हो और तुम

ये तो जानती ही हो की मैं बिना चूत के एक दिन भी नही रह पाता मम्मी ने

ऐसा चस्का लगाया है की अब तो हर रात चूत चाहिये मैं जल्दी निपटा दूँगा..

दीदी== चल हरामी मुझे पता है तेरी जल्दी भी कितनी देर मे होती है देख अभी

तू मान जा रात को आज जी भर कर चोद लेना…

मैं उनकी चूची मसले जा रहा था और साड़ी के पीछे ही अपने लंड को उनकी गांड

की दरार मे घुसाए जा रहा था।

दीदी== तू मानेगा नही देख माँ जी के आने का वक़्त भी हो रहा है और अभी

मुझे बहुत सारा काम करना है

मैं== दीदी अच्छा कपड़ों के उपर से ही करूँगा मेरी प्यारी दीदी अब तो मान

जाओ तुम्हे तुम्हारी प्यारी चूत की कसम



दीदी– चल अच्छा अब तू मान नही रहा तो चोद ले एकबार.. पर तू जानता है बिना

कपड़े उतारे मुझे मज़ा नही आता..

मैं === क्या करूँ मज़बूरी है अब जल्दी मे ऐसे ही करना पड़ेगा…

और उसके बाद मैने दीदी की साड़ी को पेटीकोट समेत उपर उठाया और उनकी चूत

को चूमने लगा तो दीदी मेरे सर के बालों को सहलाने लगी और मैं उसकी चूत

चूमता जा रहा था दीदी वो बोली आअहह.. राज अब बस करो और अपना मोटा लंड

घुसेड दो मेरी चूत मे जल्दी से इससे पहले की माँ जी आ जाए मुझे ठंडा कर

दो…



मैने दीदी का एक पैर उठा कर सिंक पर रख दिया सिंक की उचाई काफ़ी थी फिर

भी मैने रख दिया जिससे की उनकी चूत का मूह पूरी तरह से चिर गया था और

उसके बाद मैने अपनी लूँगी उतार कर वहीं एक तरफ फेक दी और अपना लंड पकड़

कर उनकी चूत से भिड़ाया ही था की पप्पू के रोने की आवाज़ आने लगी।

मैं == इस मादरचोद को भी अभी ही जागना था…

दीदी== हा.. तो जब उसका मामा मादरचोद और बहनचोद है तो भला भांजा कहाँ

पीछे रहेगा वो भी बड़ा होकर मुझे चोदेगा अब चल हट और मुझे मुन्ना को दूध

पिलाने दे…

मैं– दीदी अब आप उसको दूध पिलाओगी और यहाँ मेरा दूध ऐसे ही निकल जाएगा और

फिर तुम्हारी खूंसट सास भी आती ही होगी…

दीदी=== अरे हरामी मेरी इतनी अच्छी सासू को क्यों गाली देता है रे मैं

अभी तेरा इलाज किए देती हूँ मैं यहीं लाकर उसको दूध पिलाए देती हूँ वो

दूध पिता रहेगा और तू भी फटाफट अपना काम कर लेना… और फिर दीदी पप्पू को

ले आई और अपने सीने से चिपका कर उसको दूध पिलाने लगी और मैने फिर से उनकी

टाँग उठा कर सिंक पर रख दी।

दीदी== अरे कमीने अब जब तू देख रहा है मैं पप्पू को दूध पीला रही हूँ तो

कोई आसान सा पोज़ मे चोद लेता क्या यही आसन करना ज़रूरी है..?

राज== बहन की लौडी मैने कहा था क्या इसको लाने को पड़ा रहने देती को वहीं..

दीदी== हा.. और तू मुझे आधे घंटे से पहले तो छोड़ने वाला नही था तब तक

बेचारा रोता रहता उसके बाद मैने दीदी की चूत मे अपना लंड डाला और दम दम

धक्के मारने लगा।

दीदी== आआअहह राज ज़रा धीरे धीरे करो ना पप्पू कहीं गिर ना जाए आआईयईईईईई..

राज== मेरे लंड से गिर जाए.. क्यों लाई थी इसे यहाँ माँ चुदाने को और

मैने अपने धक्कों की रफ़्तार और बड़ा दी थी।

हम लोग अभी चुदाई कर ही रहे थे तभी दीदी को कुछ आहट सी लगी…

दीदी== राज तुमने दरवाजा तो बंद कर दिया था ना..?

मैं– नही दीदी..

दीदी== तब तो लगता है आज तेरे साथ साथ मेरी भी गांड फटी मुझे लग रहा है

माँ जी अंदर आ चुकी है..



इतना सुनते ही मैने झट से अपना लंड दीदी की चूत से निकाला और अपनी लूँगी

समेट कर तुरंत बाहर आया तो देखा सही मे माँ जी मंदिर से वापिस आ चुकी थी

और अपने रूम मे थी कुछ देर बाद ही दीदी भी अपनी साड़ी को सही करते हुए

पप्पू को मुझे देते हुए बोली. ले राज ज़रा इसे खिला बहुत परेशान कर रहा

है बर्तन भी नही धोने दिए….

अभी तक मेरा और दीदी का चेहरा डरा सा हो चुका था क्योंकि हम लोगों को लग

रहा था की शायद हमारी चुदाई सासू माँ ने देख ली पर शायद ऐसा नही था या वो

देख कर अंजान बन रही थी. तब ही सासू माँ बोली बेटी किसने तुझे परेशान

किया और बर्तन नही धोने दिए…

उनके इस सवाल पर हम दोनो ने जब उनकी तरफ देखा तो उनकी नज़रों मे कुछ और

ही बात थी मुझसे रहा नही गया और मैं बाहर निकल गया।

दोस्तों बात यहीं खत्म नही होती सासू माँ ने करीब 15मिनट वहाँ खड़े होकर

हमारी और दीदी की चुदाई देखी थी.



जिसका उन्होने शाम को हम लोगों को बहुत बुरा भला कहा मगर उसके बाद कैसे

एक झटके से उन्होने अपना पेटीकोट उपर करके अपनी चूत मेरे आगे कर दी और

दीदी की भी उन्होने परवाह ना करते हुए अपनी पुरानी भोसड़ी का जो बाजा

बजवाया उसका ज़िक्र आप सबको बताऊंगा ज़रूर पर अभी नही क्योंकि मम्मी का

फोन आया है शायद उनकी भोसड़ी मे कीड़े रेंगने लगे जो की मेरे लंड की ठोकर

से ही शांत होती है।

अच्छा दोस्तों अभी मे चलता हूँ….आपको मेरी यहाँ तक की कहानी कैसी लगी

मुझे कमेन्ट जरुर करना . . . इसके बाद में आपको बताऊंगा कैसे मेने बहन की

सास को चोदा।